नोटबंदी के बाद से भारत में डिजिटल रूप से लेनदेन करने वालों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। इस कारण भारत में पेटीएम, फोन पे, मोबिक्विक जैसी कंपनियों को एक बड़ा बाजार मिला। एक समय ऐसा था जब लोग डिजिटल रूप से लेन देन करने के लिए काफी घबराते थे। वहीं आज के समय में डिजिटल भुगतान भी सामान्य तौर पर की जाने वाली लेन देन जैसा ही आम हो गया है। भारत में बड़े पैमाने पर हो रही डिजिटल भुगतान को रेगुलेट करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अक्सर कई नियम लेकर आता रहता है। इसी कड़ी में चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति को पेश करते हैं हुए शक्तिकांत दास ने भारत में हो रही डिजिटल पेमेंट को लेकर एक बड़ी जानकारी दी है, जिसका एक बड़ा असर डिजिटल रूप से पेमेंट करने वाले लोगों के ऊपर होगा। इसी कड़ी में आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से –
शक्तिकांत दास ने बुधवार को चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति को पेश किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि आरबीआई आने वाले समय में भारत में हो रही डिजिटल भुगतान पर शुल्क वसूलने के लिए एक चर्चा पत्र जारी करेगा।
इस कारण आने वाले समय में देश के नागरिकों को डिजिटल रूप से भुगतान करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है, जिसका सीधा असर भारत के नागरिकों की जेब पर पड़ने वाला है।
शक्तिकांत दास ने इस बारे में भी बताया है कि आरबीआई, यूपीआई आधारित फीचर फोन उत्पाद लॉन्च करने की प्लानिंग बना रहा है। भारत में डिजिटल रूप से हो रही ट्रांजैक्शन में काफी वृद्धि देखने को मिली है। एक रिपोर्ट की मानें तो भारत में हर महीने यूपीआई के जरिए 122 करोड़ ट्रांजैक्शन होती है।
