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Hijab Row: जुमे के रोज, रमजान के महीने में ही हिजाब पहनने देने की मांग, आज भी होगी सुनवाई

सार

हिजाब विवाद पर मध्यस्थता कराने के एक सुझाव पर चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी ने कहा, इसके आसार कम ही दिख रहे हैं, क्योंकि यहां सांविधानिक मुद्दों की बात है। इसके बावजूद अगर दोनों पक्ष राजी होते हैं तो इस पर विचार जरूर किया जा सकता है।

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हिजाब विवाद पर सुनवाई कर रहे कर्नाटक हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को एक नई याचिका दाखिल कर कम से कम जुमे के रोज और रमजान के महीने में छात्राओं को हिजाब पहनने देने की मांग की गई। चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी की पूर्ण पीठ ने कहा कि वह इस पर विचार कर सकती है। वहीं मुख्य मामले की सुनवाई एक दिन के लिए स्थगित कर दी गई। पीठ अब शुक्रवार को इस मामले में सनुवाई करेगी। 

सुनवाई शुरू होते ही राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल प्रभुलिंग नवादगी ने सरकार से जवाब मांगने और अपनी दलील रखने के लिए पीठ से अतिरिक्त समय की मांग की। जिसे मंजूर करते हुए पीठ ने सुनवाई शुक्रवार तक टाल दी। इसके बाद पांच छात्राओं की ओर से एक नई अर्जी दाखिल करते हुए याचिकाकर्ता डॉ विनोद कुलकर्णी ने पीठ से कहा, बहुत सारी गरीब मुस्लिम बेटियों को मजहबी विचारधारा के कारण जबरन घर में बैठाकर रखा जाता है। इसके चलते उनके शिक्षा के अधिकार से अछूते रहने का भारी संकट है। आजादी के साथ साथ शिक्षा का अधिकार भी संविधान में निहित मौलिक अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना सरकार और कोर्ट की जिम्मेदारी है।

हम आपसे अंतरिम राहत के दौर पर मुस्लिम लड़कियों को कम से कम जुमे के रोज और रमजान के पाक महीने में हिजाब पहनने देने की अनुमति मांगते हैं। इस पर चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी ने कहा, आपका अनुरोध खुद आपके इस बयान का विरोधाभास है कि मुस्लिम लड़कियां वह यूनिफार्म पहनेंगी जो तय की जाएगी। इस पर डॉ कुलकर्णी ने कहा, हिजाब भी यूनिफार्म का ही हिस्सा है। 

हिजाब पर प्रतिबंध कुरान पर प्रतिबंध जैसा, जज बोले: ये दूर की कौड़ी  
डॉ कुलकर्णी ने जब पीठ के समक्ष कहा कि हिजाब पर प्रतिबंध लगाना कुरान पर प्रतिबंध लगाने जैसा है। इस पर चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी ने कहा, यह थोड़ी दूर की कौड़ी है। अभी इस बात पर ही बहस है कि कुरान में हिजाब पहनने की सिफारिश की गई है। मैं आप से पूछता हूं क्या आप दिखा सकते हैं कि कुरान में हिजाब का जिक्र कहां हैं। इस पर डॉ कुलकर्णी ने कहा, मैं खुद एक ब्राह्मण हूं। मेरी दलील यह है कि ऐसा करना कुरान पर प्रतिबंध लगाने जैसा हो सकता है। मेरा निवेदन है कि कृपया आज शुक्रवार और रमजान को हिजाब पहनने देने का आदेश जारी कर दें। इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा, आप जो कह रहे हैं हम इस पर विचार करेंगे। इस मामले में सुनवाई शुक्रवार को जारी रहेगी। 

मध्यस्थता के मामले में कोर्ट ने कहा दोनों पक्ष राजी हों तो विचार करें
हिजाब विवाद पर मध्यस्थता कराने के एक सुझाव पर चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी ने कहा, इसके आसार कम ही दिख रहे हैं, क्योंकि यहां सांविधानिक मुद्दों की बात है। इसके बावजूद अगर दोनों पक्ष राजी होते हैं तो इस पर विचार जरूर किया जा सकता है। चीफ जस्टिस ने वकीलों से याचिकाकर्ता और सरकार दोनों से बात करने की सलाह देते हुए कहा, अगर दोनों सहमत होते हैं तो हम विचार करेंगे। 

गलत तरीके से दाखिल याचिका पर नाराजगी भी जताई
चीफ जस्टिस ने वकील रहमतउल्लाह कोतवाल द्वारा गलत तरीके से दाखिल याचिका पर नाराजगी जताते हुए उसे खारिज कर दिया। एक सामाजिक कार्यकर्ता की इस अर्जी पर पीठ ने कहा, यह नियमों के  अनुरूप नहीं है। हम यहां एक गंभीर मुद्दा सुन रहे हैं और इस तरह की याचिकाएं डालकर आप कोर्ट का वक्त बरबाद कर रहे हैं। 
 

कर्नाटक सरकार ने बृहस्पतिवार को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित स्कूलों में हिजाब, भगवा शॉल या किसी अन्य धार्मिक पोषाक पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन स्कूलों में मौलाना आजाद मॉडल इंग्लिश मीडियम स्कूल भी शामिल हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, हज एवं वक्फविभाग के सचिव मेजर मणिवनन पी ने इस संबंध में सर्कुलर सभी स्कूलों को भेज दिया। इसमें कहा गया कि कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार स्कूलों में किसी तरह के धार्मिक प्रतीकों व पोषाकों को पहनने पर रोक रहेगी। 

हिजाब उतारने से मना करने पर उडुपी के सरकारी जी शंकर मेमोरियल महिला प्रथम श्रेणी डिग्री कॉलेज से 60 छात्राओं को बृहस्पतिवार को वापस घर भेज दिया गया। मुस्लिम छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन से इस बात को लेकर बहस की कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि डिग्री कालेजों में किसी प्रकार की वर्दी संहिता नहीं है लेकिन अधिकारियों ने कहा, कॉलेज विकास समिति ने नियम तय किए हैं।

हिजाब पहनकर आईं छात्राओं ने इस बात पर जोर दिया कि वह बिना सिर ढंके कक्षाओं में शामिल नहीं होंगी। उनके लिए हिजाब और शिक्षा दोनों अहम है। मुस्लिम छात्राएं चाहती हैं कि अगर सरकार ने डिग्री कॉलेजों में वर्दी संहिता लाने का फैसला किया है तो कॉलेज की समिति यह लिखित में दे। साथ ही कहा, जब तक हाईकोर्ट इस मुद्दे पर फैसला नहीं ले लेता तब तक वे कॉलेज आकर कक्षाओं में शामिल नहीं होंगी।

कॉलेज से आनलाइन कक्षाएं शुरू करने की मांग
छात्राओं ने कहा, हिजाब हमारे जीवन का हिस्सा है और वे इसे हर समय कक्षाओं में पहनी रहती हैं। जब कोई अचानक आपसे इसे उतारने के लिए कहता है तो इसे नहीं उतारा जा सकता है। हमने कॉलेज से हमारे लिए ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करने के लिए कहा है।

पुलिस का दावा, सभी कालेजों में स्थिति शांतिपूर्ण
उडुपी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्दलिंगप्पा ने बताया कि कॉलेज दोबारा खुलने के दूसरे दिन, जिले के सभी कॉलेजों में स्थिति शांतिपूर्ण है। उन्होंने कहा, उन मुस्लिम छात्राओं को सरकारी जी शंकर कॉलेज में कक्षाओं में शिरकत करने की इजाजत दी गई है जो हिजाब उतारने की इच्छुक थीं। एमजीएम कॉलेज ने गुरुवार को छुट्टी का एलान किया था और वह शुक्रवार को परीक्षा के लिए खुलेगा।

विवाद अब सिर्फ आठ हाईस्कूल व प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज तक सीमित: नागेश 
कर्नाटक सरकार ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि हिजाब विवाद अब प्रदेश के कुल 75 हजार में से सिर्फ आठ हाईस्कूल व प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज तक ही सीमित रह गया है। प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा, अब यह मामला सिर्फ मुट्ठीभर कालेजों में बचा है। हमें पूरा भरोसा है कि जल्द ही इसका समाधान हो जाएगा। हमें खुशी है कि अधिकतर विद्यार्थियों ने कोर्ट के आदेश का पालन किया है। 

विस्तार

हिजाब विवाद पर सुनवाई कर रहे कर्नाटक हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को एक नई याचिका दाखिल कर कम से कम जुमे के रोज और रमजान के महीने में छात्राओं को हिजाब पहनने देने की मांग की गई। चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी की पूर्ण पीठ ने कहा कि वह इस पर विचार कर सकती है। वहीं मुख्य मामले की सुनवाई एक दिन के लिए स्थगित कर दी गई। पीठ अब शुक्रवार को इस मामले में सनुवाई करेगी। 

सुनवाई शुरू होते ही राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल प्रभुलिंग नवादगी ने सरकार से जवाब मांगने और अपनी दलील रखने के लिए पीठ से अतिरिक्त समय की मांग की। जिसे मंजूर करते हुए पीठ ने सुनवाई शुक्रवार तक टाल दी। इसके बाद पांच छात्राओं की ओर से एक नई अर्जी दाखिल करते हुए याचिकाकर्ता डॉ विनोद कुलकर्णी ने पीठ से कहा, बहुत सारी गरीब मुस्लिम बेटियों को मजहबी विचारधारा के कारण जबरन घर में बैठाकर रखा जाता है। इसके चलते उनके शिक्षा के अधिकार से अछूते रहने का भारी संकट है। आजादी के साथ साथ शिक्षा का अधिकार भी संविधान में निहित मौलिक अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना सरकार और कोर्ट की जिम्मेदारी है।

हम आपसे अंतरिम राहत के दौर पर मुस्लिम लड़कियों को कम से कम जुमे के रोज और रमजान के पाक महीने में हिजाब पहनने देने की अनुमति मांगते हैं। इस पर चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी ने कहा, आपका अनुरोध खुद आपके इस बयान का विरोधाभास है कि मुस्लिम लड़कियां वह यूनिफार्म पहनेंगी जो तय की जाएगी। इस पर डॉ कुलकर्णी ने कहा, हिजाब भी यूनिफार्म का ही हिस्सा है। 

हिजाब पर प्रतिबंध कुरान पर प्रतिबंध जैसा, जज बोले: ये दूर की कौड़ी  

डॉ कुलकर्णी ने जब पीठ के समक्ष कहा कि हिजाब पर प्रतिबंध लगाना कुरान पर प्रतिबंध लगाने जैसा है। इस पर चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी ने कहा, यह थोड़ी दूर की कौड़ी है। अभी इस बात पर ही बहस है कि कुरान में हिजाब पहनने की सिफारिश की गई है। मैं आप से पूछता हूं क्या आप दिखा सकते हैं कि कुरान में हिजाब का जिक्र कहां हैं। इस पर डॉ कुलकर्णी ने कहा, मैं खुद एक ब्राह्मण हूं। मेरी दलील यह है कि ऐसा करना कुरान पर प्रतिबंध लगाने जैसा हो सकता है। मेरा निवेदन है कि कृपया आज शुक्रवार और रमजान को हिजाब पहनने देने का आदेश जारी कर दें। इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा, आप जो कह रहे हैं हम इस पर विचार करेंगे। इस मामले में सुनवाई शुक्रवार को जारी रहेगी। 

मध्यस्थता के मामले में कोर्ट ने कहा दोनों पक्ष राजी हों तो विचार करें

हिजाब विवाद पर मध्यस्थता कराने के एक सुझाव पर चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी ने कहा, इसके आसार कम ही दिख रहे हैं, क्योंकि यहां सांविधानिक मुद्दों की बात है। इसके बावजूद अगर दोनों पक्ष राजी होते हैं तो इस पर विचार जरूर किया जा सकता है। चीफ जस्टिस ने वकीलों से याचिकाकर्ता और सरकार दोनों से बात करने की सलाह देते हुए कहा, अगर दोनों सहमत होते हैं तो हम विचार करेंगे। 

गलत तरीके से दाखिल याचिका पर नाराजगी भी जताई

चीफ जस्टिस ने वकील रहमतउल्लाह कोतवाल द्वारा गलत तरीके से दाखिल याचिका पर नाराजगी जताते हुए उसे खारिज कर दिया। एक सामाजिक कार्यकर्ता की इस अर्जी पर पीठ ने कहा, यह नियमों के  अनुरूप नहीं है। हम यहां एक गंभीर मुद्दा सुन रहे हैं और इस तरह की याचिकाएं डालकर आप कोर्ट का वक्त बरबाद कर रहे हैं। 

 

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