एजेंसी, टोक्यो।
Published by: Jeet Kumar
Updated Tue, 16 Nov 2021 12:20 AM IST
सार
जापान के परमाणु संयंत्र के पानी को समुद्र में छोड़ने के फैसले का विरोध भी किया जा रहा है। मछुआरों, स्थानीय निवासियों और चीन तथा दक्षिण कोरिया सहित जापान के कुछ पड़ोसी देशों ने कड़ा विरोध किया है।
फुकुशिमा का परमाणु संयंत्र
– फोटो : social media
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विस्तार
जापान के अधिकारियों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की टीम के विशेषज्ञ जापानी अधिकारियों से मिलेंगे और पानी को योजनाबद्ध तरीके से छोड़े जाने की तकनीकी पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
जापान सरकार और ‘टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी होल्डिंग्स’ संयंत्र के संचालक ने अप्रैल में 2023 के वसंत में उपचारित रेडियोधर्मी पानी को धीरे-धीरे छोड़ना शुरू करने की योजना की घोषणा की है, ताकि सैकड़ों भंडारण टैंक को हटाने और नष्ट संयंत्र को बंद करने की व्यवस्था हो सके।
इस योजना का मछुआरों, स्थानीय निवासियों और चीन तथा दक्षिण कोरिया सहित जापान के कुछ पड़ोसी देशों ने कड़ा विरोध किया है। बता दें कि 2011 में भूकंप और सुनामी आने के बाद फुकुशिमा दाइची संयंत्र में तीन बार ‘मेल्टडाउन’ की घटना हुई थी।
इस प्रक्रिया में ईंधन अत्यधिक गर्म हो जाता है और वह संयंत्र के कोर या कवच को पिघला देता है। जापानी अधिकारियों का कहना है कि संयंत्र को बंद करने के लिए पानी को निकालना आवश्यक है और पानी को समुद्र में छोड़ा जाना सबसे यथार्थवादी एवं उचित विकल्प है।
