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असम: बंद पेपर मिल के कर्मचारी की इलाज के अभाव में मौत, 1200 से ज्यादा कर्मियों को 2017 से नहीं मिला वेतन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Wed, 20 Apr 2022 08:09 PM IST

सार

कछार पेपर मिल में अक्टूबर 2015 में काम बंद कर दिया गया था, इसके अलावा असम के जगीरोड स्थित नौगांव मिल को भी 2017 के मार्च महीने में बंद हो गई थी। ये मिल पहले हिंदुस्तान पेपर कार्पोरेशन के द्वारा संचालित किया जाता था। इन दोनों मिलों के बंद हो जाने के बाद से अब तक 100 से ज्यादा कर्मचारियों की मौत हो चुकी है।

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असम के कछार जिले में पेपर मिल के बंद हो जाने के कारण उसमें काम करने वाले कर्मचारियों की हालात बदतर हो गए हैं। आलम यह है कि इनकम बंद हो जाने के कारण बीमार कर्मचारी अपना इलाज तक नहीं करवा पा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां बंद पड़े पेपर मिल के एक बीमार कर्मचारी की इलाज के अभाव में मौत हो गई। दरअसल पेपर मिल बंद होने के कारण उसकी आय बंद थी। जिसके कारण वह अपना इलाज नहीं करा पा रहा था।

कछार पेपर मिल्स की ‘मान्यताप्राप्त यूनियन की संयुक्त कार्रवाई समिति’ ने इसकी जानकारी दी। समिति ने बताया कि ओडिशा के कटक निवासी राजेंद्र कुमार दलोई गुर्दे से संबंधित रोगों से पीड़ित था। मिल के बंद हो जाने के कारण उसकी आय भी बंद हो गई थी, जिसके कारण वह इलाज करा पाने में असमर्थ था। बीमारी के कारण सोमवार को राजेंद्र की मौत हो गई। 

गौरतलब है कि कछार पेपर मिल में अक्टूबर 2015 में काम बंद कर दिया गया था, इसके अलावा असम के जगीरोड स्थित नौगांव मिल को भी 2017 के मार्च महीने में बंद हो गई थी। ये मिल पहले हिंदुस्तान पेपर कार्पोरेशन के द्वारा संचालित किया जाता था। इन दोनों मिलों के बंद हो जाने के बाद से अब तक 100 से ज्यादा कर्मचारियों की मौत हो चुकी है।

‘मान्यताप्राप्त यूनियन की संयुक्त कार्रवाई समिति’ ने बताया कि बीते साल मई में असम की सत्ता में हिमंता बिस्वा के आने बाद से 18 लोगों की मौत हो चुकी है। समिति ने यह भी बताया कि असम सरकार ने इन दोनों मिलों का अधिग्रहण करने का एलान भी किया था। असम सरकार ने कहा था कि उसने एचपीसी की दो मिलों का अधिग्रहण 375 करोड़ रुपये में किया है। इसके बाद सरकार श्रमिकों के लिए राहत पैकेज पर सहमत भी हो गई है, लेकिन अभी तक कोई भी फंड जारी नहीं हुआ है। समिति ने बताया कि जनवरी 2017 से कछार और इसी तरह मार्च 2017 से नौगांव मिलों के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। जिसके कारण लगभग 1200 कर्मचारी बिना वेतन के जीने को मजबूर हैं। 

समिति ने यह भी बताया कि एक समय में ये दोनों पेपर मिलें एशिया की सबसे बड़ी पेपर मिल मानी जाती थीं। इन दोनों मिलों के बंद होने के कारण चार लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। 

विस्तार

असम के कछार जिले में पेपर मिल के बंद हो जाने के कारण उसमें काम करने वाले कर्मचारियों की हालात बदतर हो गए हैं। आलम यह है कि इनकम बंद हो जाने के कारण बीमार कर्मचारी अपना इलाज तक नहीं करवा पा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां बंद पड़े पेपर मिल के एक बीमार कर्मचारी की इलाज के अभाव में मौत हो गई। दरअसल पेपर मिल बंद होने के कारण उसकी आय बंद थी। जिसके कारण वह अपना इलाज नहीं करा पा रहा था।

कछार पेपर मिल्स की ‘मान्यताप्राप्त यूनियन की संयुक्त कार्रवाई समिति’ ने इसकी जानकारी दी। समिति ने बताया कि ओडिशा के कटक निवासी राजेंद्र कुमार दलोई गुर्दे से संबंधित रोगों से पीड़ित था। मिल के बंद हो जाने के कारण उसकी आय भी बंद हो गई थी, जिसके कारण वह इलाज करा पाने में असमर्थ था। बीमारी के कारण सोमवार को राजेंद्र की मौत हो गई। 

गौरतलब है कि कछार पेपर मिल में अक्टूबर 2015 में काम बंद कर दिया गया था, इसके अलावा असम के जगीरोड स्थित नौगांव मिल को भी 2017 के मार्च महीने में बंद हो गई थी। ये मिल पहले हिंदुस्तान पेपर कार्पोरेशन के द्वारा संचालित किया जाता था। इन दोनों मिलों के बंद हो जाने के बाद से अब तक 100 से ज्यादा कर्मचारियों की मौत हो चुकी है।

‘मान्यताप्राप्त यूनियन की संयुक्त कार्रवाई समिति’ ने बताया कि बीते साल मई में असम की सत्ता में हिमंता बिस्वा के आने बाद से 18 लोगों की मौत हो चुकी है। समिति ने यह भी बताया कि असम सरकार ने इन दोनों मिलों का अधिग्रहण करने का एलान भी किया था। असम सरकार ने कहा था कि उसने एचपीसी की दो मिलों का अधिग्रहण 375 करोड़ रुपये में किया है। इसके बाद सरकार श्रमिकों के लिए राहत पैकेज पर सहमत भी हो गई है, लेकिन अभी तक कोई भी फंड जारी नहीं हुआ है। समिति ने बताया कि जनवरी 2017 से कछार और इसी तरह मार्च 2017 से नौगांव मिलों के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। जिसके कारण लगभग 1200 कर्मचारी बिना वेतन के जीने को मजबूर हैं। 

समिति ने यह भी बताया कि एक समय में ये दोनों पेपर मिलें एशिया की सबसे बड़ी पेपर मिल मानी जाती थीं। इन दोनों मिलों के बंद होने के कारण चार लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। 

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