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LIC IPO: देश के सबसे बड़े आईपीओ पर रूस-यूक्रेन युद्ध का साया, लॉन्च का समय आगे बढ़ने के संकेत

LIC IPO: देश के सबसे बड़े आईपीओ पर रूस-यूक्रेन युद्ध का साया, लॉन्च का समय आगे बढ़ने के संकेत

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Wed, 02 Mar 2022 09:52 AM IST

सार

Government May Review Timing Of LIC IPO: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का बुधवार को सातवां दिन है और यह लगातार तेज होता जा रहा है। अब इसका साया इस महीने लॉन्च होने वाले देश के सबसे बड़े आईपीओ पर भी दिख रहा है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि एलआईसी आईपीओ को पेश करने का समय आगे बढ़ाया जा सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि हालात को देखते हुए इसकी टाइमलाइन पर विचार हो सकता है। 

 

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रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का बुधवार को सातवां दिन है और यह लगातार तेज होता जा रहा है। इससे जहां शेयर बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ रहा है। वहीं अब इसका साया इस महीने लॉन्च होने वाले देश के सबसे बड़े आईपीओ पर भी दिख रहा है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि एलआईसी आईपीओ को पेश करने का समय आगे बढ़ाया जा सकता है। 

टाइमलाइन पर विचार संभव
गौरतलब है कि देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का आईपीओ इस महीने पेश होना प्रस्तावित है। ये देश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। लेकिन, जैसे-जैसे यूक्रेन पर रूस के हमले तेज हो रहे हैं इस आईपीओ पर भी काले बादल मंडराने लगे हैं। मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिए हैं कि अगर तेजी से बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात की वजह से नौबत आई तो सरकार एलआईसी के आईपीओ की टाइमलाइन पर फिर से विचार कर सकती है।

अंतरराष्ट्रीय हालात पर नजर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि वैसे तो मैं एलआईसी आईपीओ के मामले में पहले से तय कार्यक्रम के हिसाब से ही आगे बढ़ना चाहूंगी, क्योंकि इसके लिए हमने भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए काफी पहले से तैयारी की हुई है। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय हालात को ध्यान में रखते हुए जरूरत पड़ी तो मैं इसे पेश करने के समय को लेकर फिर से विचार करने के लिए भी तैयार हूं। उन्होंने कहा कि अगर प्राइवेट सेक्टर के किसी प्रमोटर को इस तरह का फैसला करना हो तो उसे सिर्फ अपनी कंपनी के बोर्ड को ही सफाई देनी होती है, लेकिन मुझे इस बारे में सारी दुनिया को स्पष्टीकरण देना पड़ेगा। 

विनिवेश लक्ष्य हो सकता है प्रभावित 
गौरतलब है कि अगर सरकार ने हालात पर फिर से विचार किया तो एलआईसी आईपीओ की टाइमलाइन पर असर पड़ना संभव है। इस आईपीओ के लिए मसौदा दस्तावेज बीती 13 फरवरी को बाजार नियामक सेबी के पास जमा कराए गए थे और कई रिपोर्टों में संभावना जताई जा रही थी कि इसे 11 मार्च को लॉन्च किया जा सकता है। दस्तावेजों के अनुसार, एलआईसी की एंबेडेड वैल्यू 5 लाख 40 हजार करोड़ रुपये (71.7 अरब डॉलर) आंकी गई है। दरअसल, मोदी सरकार ने 31 मार्च 2022 को खत्म होने वाले वित्त वर्ष के दौरान अपने बजट घाटे को पूरा करने के लिए सरकारी असेट्स को बेचने की जो योजना बनाई है, उसका सबसे बड़ा हिस्सा एलआईसी के आईपीओ से ही आना है। 

5 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही सरकार
बता दें कि एलआईसी के आईपीओ के जरिए सरकार इसमें अपनी पांच फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है। पुर्व में जारी रिपोर्टों के अनुसार, एलआईसी के आईपीओ का साइज 63,000 करोड़ रुपये हो सकता है। इसमें पॉलिसीधारकों के लिए 10 फीसदी हिस्सा रिजर्व रखे जाने की बात कही जा रही है, जबकि आईपीओ में कंपनी के कर्मचारियों के लिए पांच फीसदी हिस्सा रिजर्व रखा जा सकता है। 

विस्तार

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का बुधवार को सातवां दिन है और यह लगातार तेज होता जा रहा है। इससे जहां शेयर बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ रहा है। वहीं अब इसका साया इस महीने लॉन्च होने वाले देश के सबसे बड़े आईपीओ पर भी दिख रहा है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि एलआईसी आईपीओ को पेश करने का समय आगे बढ़ाया जा सकता है। 

टाइमलाइन पर विचार संभव

गौरतलब है कि देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का आईपीओ इस महीने पेश होना प्रस्तावित है। ये देश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। लेकिन, जैसे-जैसे यूक्रेन पर रूस के हमले तेज हो रहे हैं इस आईपीओ पर भी काले बादल मंडराने लगे हैं। मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिए हैं कि अगर तेजी से बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात की वजह से नौबत आई तो सरकार एलआईसी के आईपीओ की टाइमलाइन पर फिर से विचार कर सकती है।

अंतरराष्ट्रीय हालात पर नजर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि वैसे तो मैं एलआईसी आईपीओ के मामले में पहले से तय कार्यक्रम के हिसाब से ही आगे बढ़ना चाहूंगी, क्योंकि इसके लिए हमने भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए काफी पहले से तैयारी की हुई है। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय हालात को ध्यान में रखते हुए जरूरत पड़ी तो मैं इसे पेश करने के समय को लेकर फिर से विचार करने के लिए भी तैयार हूं। उन्होंने कहा कि अगर प्राइवेट सेक्टर के किसी प्रमोटर को इस तरह का फैसला करना हो तो उसे सिर्फ अपनी कंपनी के बोर्ड को ही सफाई देनी होती है, लेकिन मुझे इस बारे में सारी दुनिया को स्पष्टीकरण देना पड़ेगा। 

विनिवेश लक्ष्य हो सकता है प्रभावित 

गौरतलब है कि अगर सरकार ने हालात पर फिर से विचार किया तो एलआईसी आईपीओ की टाइमलाइन पर असर पड़ना संभव है। इस आईपीओ के लिए मसौदा दस्तावेज बीती 13 फरवरी को बाजार नियामक सेबी के पास जमा कराए गए थे और कई रिपोर्टों में संभावना जताई जा रही थी कि इसे 11 मार्च को लॉन्च किया जा सकता है। दस्तावेजों के अनुसार, एलआईसी की एंबेडेड वैल्यू 5 लाख 40 हजार करोड़ रुपये (71.7 अरब डॉलर) आंकी गई है। दरअसल, मोदी सरकार ने 31 मार्च 2022 को खत्म होने वाले वित्त वर्ष के दौरान अपने बजट घाटे को पूरा करने के लिए सरकारी असेट्स को बेचने की जो योजना बनाई है, उसका सबसे बड़ा हिस्सा एलआईसी के आईपीओ से ही आना है। 

5 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही सरकार

बता दें कि एलआईसी के आईपीओ के जरिए सरकार इसमें अपनी पांच फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है। पुर्व में जारी रिपोर्टों के अनुसार, एलआईसी के आईपीओ का साइज 63,000 करोड़ रुपये हो सकता है। इसमें पॉलिसीधारकों के लिए 10 फीसदी हिस्सा रिजर्व रखे जाने की बात कही जा रही है, जबकि आईपीओ में कंपनी के कर्मचारियों के लिए पांच फीसदी हिस्सा रिजर्व रखा जा सकता है। 

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