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पाकिस्तान: आसान नहीं होगी शरीफ की राह, इमरान खान बने रहेंगे बड़ी चुनौती 

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Tue, 12 Apr 2022 12:46 PM IST

सार

पीटीआई की रणनीति अगले आम चुनाव तक देश में सियासी अस्थिरता की धारणा बनाए रखना है। रविवार को मिले भारी जन समर्थन से पीटीआई का मनोबल बढ़ा है। 

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पाकिस्तान में ‘आयातित सरकार’ के गठन के विरोध में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के आह्वान पर रविवार रात देश भर में जिस बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, उसे शाहबाज शरीफ के नेतृत्व में बनी गठबंधन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। नेशनल असेंबली में शनिवार देर रात अविश्वास प्रस्ताव पर अपनी हार के बाद इमरान खान ने लोगों से रविवार को इफ्तार के बाद सड़कों पर उतर कर विरोध जताने की अपील की थी। तमाम मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इसका व्यापक असर देखने को मिला है।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक इमरान खान देश की जनता के एक बड़े हिस्से के मन में यह बात बैठाने में सफल हो गए हैं कि उनकी सरकार को विदेशी साजिश के तहत हटाया गया। इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेता खुलेआम आरोप लगा रहे हैं कि ये साजिश अमेरिका ने रची। इसको लेकर इमरान खान और पीटीआई ने ‘अमेरिका से आजादी’ का नारा उछाल दिया है। रविवार को इमरान खान ने एक ट्वीट में कहा- विदेशी साजिश से सरकार बदली गई है। अब स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत हो रही है।

जन समर्थन ने बढ़ाया पीटीआई का मनोबल
पीटीआई नेताओं ने यह साफ कहा है कि वे नई सरकार को विदेश से संचालित सरकार समझते हैं। पर्यवेक्षकों के मुताबिक पीटीआई के इस रुख से साफ है कि वह राजकाज में रुकावट डालने की पूरी कोशिश करेगी। पीटीआई की रणनीति अगले आम चुनाव तक देश में सियासी अस्थिरता की धारणा बनाए रखना है। रविवार को मिले भारी जन समर्थन से पीटीआई का मनोबल बढ़ा है, लेकिन इस मुद्दे पर पीटीआई में गहरे मतभेद उभर आए हैं कि क्या उसके सभी सांसद नेशनल असेंबली से सामूहिक इस्तीफा दे दें। रविवार को पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में इस बारे में सहमति नहीं बन सकी। इसलिए फैसला हुआ कि इस बारे में फैसला लेने का अधिकार इमरान खान और पार्टी की संसदीय समिति को सौंप दिया जाए। सामूहिक इस्तीफे की राय का विरोध करने वाले धड़े का कहना है कि यह कदम ‘राजनीतिक आत्महत्या’ साबित होगी।

आम चुनाव में फायदा उठाने कोशिश 
बताया जाता है कि पीटीआई के वरिष्ठ नेता फव्वाद चौधरी ने सामूहिक इस्तीफे की वकालत की। उन्होंने एक ट्वीट में भी यह कह दिया कि पीटीआई ने फैसला किया है कि उसके सदस्य नेशनल असेंबली के साथ-साथ प्रांतीय असेंबलियों से भी इस्तीफा दे देंगे। लेकिन कार्यसमिति की बैठक के बाद जब उन्होंने पत्रकारों को संबोधित किया, तब उन्होंने इस बारे में कोई बात नहीं कही।

बताया जाता है कि बैठक में बहुमत की राय यह थी कि पीटीआई सांसदों ने अगर इस्तीफा दे दिया, तो उससे नई सरकार को अपना एजेंडा लागू करने का खुला मैदान मिल जाएगा। इसलिए पार्टी सांसदों को सदन में रहते हुए सरकार के कामकाज में रुकावट डालनी चाहिए। इस बीच नए चुनाव की मांग को लेकर पार्टी को सड़कों पर लगातार आंदोलन करना चाहिए।

बैठक में इमरान खान ने यह साफ किया कि जल्द आम चुनाव की मांग को लेकर उनकी रणनीति एक बड़े जन आंदोलन का नेतृत्व करने की है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक आंदोलन के जरिए इमरान खान अमेरिका विरोधी भावनाएं भड़काते हुए लोगों को गोलबंद करेंगे। इसका फायदा उन्हें अगले आम चुनाव में मिल सकता है।

विस्तार

पाकिस्तान में ‘आयातित सरकार’ के गठन के विरोध में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के आह्वान पर रविवार रात देश भर में जिस बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, उसे शाहबाज शरीफ के नेतृत्व में बनी गठबंधन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। नेशनल असेंबली में शनिवार देर रात अविश्वास प्रस्ताव पर अपनी हार के बाद इमरान खान ने लोगों से रविवार को इफ्तार के बाद सड़कों पर उतर कर विरोध जताने की अपील की थी। तमाम मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इसका व्यापक असर देखने को मिला है।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक इमरान खान देश की जनता के एक बड़े हिस्से के मन में यह बात बैठाने में सफल हो गए हैं कि उनकी सरकार को विदेशी साजिश के तहत हटाया गया। इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेता खुलेआम आरोप लगा रहे हैं कि ये साजिश अमेरिका ने रची। इसको लेकर इमरान खान और पीटीआई ने ‘अमेरिका से आजादी’ का नारा उछाल दिया है। रविवार को इमरान खान ने एक ट्वीट में कहा- विदेशी साजिश से सरकार बदली गई है। अब स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत हो रही है।

जन समर्थन ने बढ़ाया पीटीआई का मनोबल

पीटीआई नेताओं ने यह साफ कहा है कि वे नई सरकार को विदेश से संचालित सरकार समझते हैं। पर्यवेक्षकों के मुताबिक पीटीआई के इस रुख से साफ है कि वह राजकाज में रुकावट डालने की पूरी कोशिश करेगी। पीटीआई की रणनीति अगले आम चुनाव तक देश में सियासी अस्थिरता की धारणा बनाए रखना है। रविवार को मिले भारी जन समर्थन से पीटीआई का मनोबल बढ़ा है, लेकिन इस मुद्दे पर पीटीआई में गहरे मतभेद उभर आए हैं कि क्या उसके सभी सांसद नेशनल असेंबली से सामूहिक इस्तीफा दे दें। रविवार को पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में इस बारे में सहमति नहीं बन सकी। इसलिए फैसला हुआ कि इस बारे में फैसला लेने का अधिकार इमरान खान और पार्टी की संसदीय समिति को सौंप दिया जाए। सामूहिक इस्तीफे की राय का विरोध करने वाले धड़े का कहना है कि यह कदम ‘राजनीतिक आत्महत्या’ साबित होगी।

आम चुनाव में फायदा उठाने कोशिश 

बताया जाता है कि पीटीआई के वरिष्ठ नेता फव्वाद चौधरी ने सामूहिक इस्तीफे की वकालत की। उन्होंने एक ट्वीट में भी यह कह दिया कि पीटीआई ने फैसला किया है कि उसके सदस्य नेशनल असेंबली के साथ-साथ प्रांतीय असेंबलियों से भी इस्तीफा दे देंगे। लेकिन कार्यसमिति की बैठक के बाद जब उन्होंने पत्रकारों को संबोधित किया, तब उन्होंने इस बारे में कोई बात नहीं कही।

बताया जाता है कि बैठक में बहुमत की राय यह थी कि पीटीआई सांसदों ने अगर इस्तीफा दे दिया, तो उससे नई सरकार को अपना एजेंडा लागू करने का खुला मैदान मिल जाएगा। इसलिए पार्टी सांसदों को सदन में रहते हुए सरकार के कामकाज में रुकावट डालनी चाहिए। इस बीच नए चुनाव की मांग को लेकर पार्टी को सड़कों पर लगातार आंदोलन करना चाहिए।

बैठक में इमरान खान ने यह साफ किया कि जल्द आम चुनाव की मांग को लेकर उनकी रणनीति एक बड़े जन आंदोलन का नेतृत्व करने की है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक आंदोलन के जरिए इमरान खान अमेरिका विरोधी भावनाएं भड़काते हुए लोगों को गोलबंद करेंगे। इसका फायदा उन्हें अगले आम चुनाव में मिल सकता है।

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