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क्यों जीनत अमान को रेप सीन के लिए देनी पड़ी राज बब्बर को ट्रेनिंग

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दोस्तों आज बात होगी अभिनेता से नेता बने राज बब्बर की…राज बब्बर अपने जमाने के एक दिग्गज कलाकार भी रहे हैं…150 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले राज बब्बर ने एनएसडी से मेथड एक्टिंग की तालीम ली थी…इसके बाद हीरो बनने के लिए उन्होंने मुंबई का रुख किया…लेकिन जो ख्वाब उन्होंने देखा था वो आसान नहीं था…राज की फिल्मों में शुरुआत नकारात्मक भूमिका से हुई…उन्हें ऐसा रोल मिला, जिसे करने में उनकी हालत खराब हो गई थी….उन्हें डर था कि इसके बाद कभी वह फिल्म के हीरो नहीं बन पाएंगे, लेकिन यहीं भूमिका उनके लिए वरदान भी साबित हुई…किस्सा है फिल्म इंसाफ का तराजू का…जिसमें उनके साथ उस जमाने की नंबर वन हीरोइन जीनत अमान, पद्मिनी कोल्हापुरे और दीपक पराशर  मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म में राज बब्बर का किरदार एक बलात्कारी का था, इसे राज ने जिस खूबसूरती ने निभाया, उसकी आज भी तारीफ की जाती है।


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क्यों जीनत अमान को रेप सीन के लिए देनी पड़ी राज बब्बर को ट्रेनिंग

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दोस्तों आज बात होगी अभिनेता से नेता बने राज बब्बर की…राज बब्बर अपने जमाने के एक दिग्गज कलाकार भी रहे हैं…150 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले राज बब्बर ने एनएसडी से मेथड एक्टिंग की तालीम ली थी…इसके बाद हीरो बनने के लिए उन्होंने मुंबई का रुख किया…लेकिन जो ख्वाब उन्होंने देखा था वो आसान नहीं था…राज की फिल्मों में शुरुआत नकारात्मक भूमिका से हुई…उन्हें ऐसा रोल मिला, जिसे करने में उनकी हालत खराब हो गई थी….उन्हें डर था कि इसके बाद कभी वह फिल्म के हीरो नहीं बन पाएंगे, लेकिन यहीं भूमिका उनके लिए वरदान भी साबित हुई…किस्सा है फिल्म इंसाफ का तराजू का…जिसमें उनके साथ उस जमाने की नंबर वन हीरोइन जीनत अमान, पद्मिनी कोल्हापुरे और दीपक पराशर  मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म में राज बब्बर का किरदार एक बलात्कारी का था, इसे राज ने जिस खूबसूरती ने निभाया, उसकी आज भी तारीफ की जाती है।

दोस्तों दिलीप कुमार और सुरैया अपने जमाने के दिग्गज कलाकार रहे हैं। जहां दिलीप कुमार हिंदी सिनेमा के ट्रेजेडी किंग कहलाए तो वहीं सुरैया अपने जमाने की मशहूर और सबसे खूबसूरत हीरोइनों में से एक रहीं। लोग जितना सुरैया की ऐक्टिंग के दीवाने थे, उससे कहीं ज्यादा उनकी खूबसूरती के। 40, 50 और 60 के दशक में हर तरफ सुरैया के ही चर्चे थे। हीरो तो क्या, हर निर्माता-निर्देशक सुरैया को अपनी फिल्म की हीरोइन बनाना चाहता था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिलीप कुमार और सुरैया ने साथ काम क्यों नहीं किया…तो आइए आपको बताते हैं…

दोस्तों जब बात हो हिंदी सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ डांसरों की तो सबसे पहले हेलेन और वैजयन्ती माला जैसी सदाबहार हीरोइनों का नाम आता है, लेकिन उनसे भी पहले एक ऐसी हीरोइन और कैबरे डांसर रहीं जिनके डांस के सभी लोग कायल थे। ये थीं कुकू मोरे। कुकू 50 के दशक की जानी-मानी कैबरे डांसर रहीं। कुकू एक ऐसी हीरोइन थीं जो अपने भड़कीले अंदाज, भड़कीले पहनावे और खर्चीले ढंग के लिए जानी जाती थीं। लेकिन आखिरी वक्त में वो ऐसी फटेहाल हो गईं कि दवाई खरीदने तक के पैसे नहीं बचे।

सुप्रिया पाठक बॉलीवुड की उन चुनींदा एक्ट्रेस में शुमार हैं जो करीब 40 साल से दर्शकों को एंटरटेन कर रही हैं। थिएटर और टीवी में अपने हुनर को दिखाने के बाद सुप्रिया फिल्मों तक पहुंची हैं। सुप्रिया पाठक का टीवी सीरियल ‘खिचड़ी’ आज भी दर्शकों की पहली पसंद है। सुप्रिया ने साल 1981 में अपने करियर की शुरुआत फिल्म ‘कलयुग’ से की थी। बॉलीवुड में आने से पहले सुप्रिया एक थिएटर आर्टिस्ट थीं । साथ ही एक ट्रेंड भरतनाट्यम डांसर भी हैं।

दोस्तों आज बात होगी एक ऐसी मोहब्बत की जो शायद ही आपको पता हो…बॉलीवुड में रोमांटिक फिल्मों के एक नए दौर को शुरू करने वाले निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा और मुमताज की…क्यों उड़ गए न होश…जी हां…अपनी फिल्मों से प्रेम की नई परिभाषा गढ़ने वाले यश चोपड़ा भी मुमताज की मोहब्बत में गिरफ्त थे…चलिए सुनाते हैं ये किस्सा….60-70 के दशक की मशहूर हीरोइन मुमताज तो आप सभी को याद होंगी ही। उस दौर में उनकी अदा, स्टाइल और एक्टिंग के दौरान उनकी हल्की सी मुस्कान सभी को अपना दीवाना बना देती थी। लेकिन शायद ही आप जानते हों कि लाखों दिलों को घायल कर देने वाली मुमताज निर्देशक यश चोपड़ा के प्यार में पागल थीं। खुद यश चोपड़ा भी मुमताज को बेहद पसंद करते थे।

फिल्म इंडस्ट्री चकाचौंध के साथ-साथ दर्दनाक दास्तानों से भी भरी है। आज जो स्टार सफलता के चरम पर है कल लोग उसे भूल जाएंगे और अभी तक ऐसा ही होता आया है। सिनेमा के सौ सालों में कई बड़े स्टार हुए जिन्होंने फिल्मी परदे पर राज किया लेकिन कुछ अचानक ही गुमनामी में चले गए तो कुछ दर्दभरी जिंदगी जीकर इस दुनिया से रुखसत हो गए। ऐसी ही एक हीरोइन रहीं प्रिया राजवंश। जबरदस्त हुस्न और एक्टिंग की मलिका प्रिया राजवंश ने फिल्में तो ज्यादा नहीं कीं लेकिन अपनी दिलकश आवाज और एक्टिंग की वजह से उन्होंने सभी को अपना मुरीद बना लिया था। निर्देशक चेतन आनंद तो उन पर कुछ ज्यादा ही फिदा हो गए थे। प्रिया राजवंश के फिल्मों में आने की कहानी भी किसी परियों की कथा से कम नहीं थी। 22 साल की प्रिया उस वक्त लंदन में रह रहीं थीं जब एक फोटोग्राफर ने उनकी तस्वीर खींची जो खूब वायरल हुई। ये तस्वीर एक्टर देव आनंद के भाई चेतन आनंद तक भी पहुंची और वो देखते ही प्रिया के दीवाने हो गए। उन दिनों वो अपनी फिल्म ‘हकीकत’ के लिए नए चेहरे की तलाश में थे और उन्होंने फिल्म के लिए प्रिया को साइन कर लिया। 

एक समय था जब अभिनेत्री रीना रॉय का बॉलीवुड में जादू चलता था। 70 और 80 के दशक के बीच रेखा और हेमा मालिनी से उनका कड़ा मुकाबला हुआ करता था…रीना रॉय और शत्रुघ्न सिन्हा उस दौर की सबसे हिट जोड़ी में से एक थे। दोनों ने साथ में 16 फिल्में कीं जिनमें से 11 सुपरहिट रही थीं। फिल्म कालीचरन और नागिन की सफलता के बाद रीना अपने समय की हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस बन गई थीं…रीना रॉय का बचपन में नाम सायरा अली था….उनके पिता का नाम सादिक अली और मां का नाम शारदा राय था…शारदा भी अदाकारा थीं जिन्होंने फिल्म बावरे नैन में अभिनय किया और बाद में फिल्म गुनाहगार कौन का निर्माण भी किया। जब शारदा का सादिक अली से तलाक हुआ तो उन्होंने अपने चारों बच्चों के नाम बदल दिए.. रीना रॉय को शुरू में रूपा राय नाम दिया गया था, जिसे उनकी पहली फिल्म जरूरत के निर्माता ने बदलकर “रीना रॉय” कर दिया था….

आज हम ऐसी लव स्टोरी के बारे में बताएंगे जिसमें प्यार हुआ, इकरार हुआ लेकिन ये प्यार करने वाले कभी एक ना हो सके। ये दास्तां है नरगिस और राज कपूर की बेइंतहा मोहब्बत की। तो चलिए शुरुआत करते हैं दोनों की पहली मुलाकात से… साल 1946… राज कपूर ने फिल्म ‘आग’ का निर्देशन शुरू कर दिया था। इस फिल्म के लिए राज कपूर स्टूडियो की तलाश में थे। उन्हें पता चला कि नरगिस की मां जद्दन बाई मुंबई के ‘फेमस स्टूडियो’ में रोमियो-जूलियट बना रही हैं। वो ‘फेमस स्टूडियो’ के बारे में जानना चाहते थे इसलिए राज कपूर जद्दन बाई के घर पहुंच गए। उस दिन जद्दन बाई घर पर नहीं थीं।

अमिताभ बच्चन ने दिल्ली के गुलमोहर पार्क स्थित अपने बंगले को 23 करोड़ में बेच दिया है। टीवी होस्ट रणविजय सिंह ने 18 साल बाद रिएलिटी शो ‘रोडीज’ छोड़ दिया है। रणविजय ने 2003 में टीवी शो रोडीज में एक कंटेस्टेंट के रूप में शुरुआत की थी। भूषण कुमार ओटीटी-स्पेस में पर एंट्री लेने जा रहे हैं, जिसमें वे  दिग्गज निर्देशकों के साथ वेब सीरीज का निर्माण करने जा रहे हैं।

आज हम आपको उस नायिका के बारे में बता रहे हैं जो नायिका बनने से पहले मां बन गई थी। बंगाली फ़िल्म हल्कों में मिसेज़ सेन के नाम से मशहूर सुचित्रा सेन शायद भारतीय फ़िल्म इतिहास की पहली अभिनेत्री थीं जिन्होंने अपनी पहली फ़िल्म उस समय की जब वो एक बच्ची की माँ बन चुकी थी। बंगाल में उनकी लोकप्रियता का आलम ये था कि दुर्गा पूजा के दौरान बनने वाली लक्ष्मी और सरस्वती की मूर्तियों को उनकी शक्ल देने की कोशिश की जाती थी..उनका साड़ी बांधने का अंदाज़, बाल काढ़ने का ढंग और धूप का चश्मा पहनने की अदा युवाओं में उन्माद की हद तक लोकप्रिय थी। सुचित्रा का ही बूता था कि उन्होंने सत्यजीत रे का उनके साथ काम करने का न्योता सिर्फ़ इसलिए ठुकरा दिया था क्योंकि उनकी शर्तें उनसे मेल नहीं खाती थीं। 

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