भारत में जिस तेजी से डिजिटाइजेशन ने रफ्तार पकड़ी है, उतनी ही तेजी से साइबर धोखाधड़ी के मामले भी सामने हैं। इंटरनेट ने भले ही हमारा काम आसान कर दिया हो, हम एक ही जगह से कोई भी काम आसानी से कर लेते हैं। वहीं इसकी मदद से बैठे-बैठे ही बड़े से बड़ा फ्रॉड भी कर लिया जाता है। इसलिए अधिक डिजिटल होने के साथ-साथ हमें अधिक सतर्क होने की भी जरूरत है। इसी क्रम में रिलायंस जियो ने अपने ग्राहकों को ई-केवाईसी स्कैम को लेकर सतर्क रहने को कहा है। अपने ग्राहकों को लिखे पत्र में जियो ने साइबर फ्रॉड की बढ़ती घटनाओं से आगाह किया है। जियो का कहना है कि घोटालेबाज निर्दोष ग्राहकों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। इससे पहले बीते वर्ष ऐसा ही वॉर्निंग नोटिस भारती एयरटेल और वोडाफोन के सीईओ द्वारा भी ग्राहकों को आगाह करने के लिए भेजा गया था। अब जियो ने भी यूजर्स को इससे बचने के लिए कुछ निर्देश दिए हैं।
- जियो ने नोटिस में ये कहा है कि ग्राहक अपने केवाईसी/आधार डिटेल को अपडेट करने किसी भी तरह का ऐप डाउनलोड न करें। जियो कभी भी आपसे ऐसी गतिविधियों के लिए कोई भी थर्ड पार्टी ऐप डाउनलोड करने के लिए नहीं कहता है। जियो का कहना है कि इस तरह के किसी भी सएमएस/कॉल से सतर्क रहें क्योंकि इससे ग्राहक को वित्तीय नुकसान हो सकता है।
- हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें धोखेबाज खुद को जियो के प्रतिनिधि बताकर मुख्य रूप से पेंडिंग ई-केवाईसी के बहाने ग्राहकों के बैंक अकाउंट्स, आधार और ओटीपी आदि से जानकारी प्राप्त करने पर जोर देते हैं।
- इसके अलावा एक और तरीके से धोखेबाज मासूम लोगों को ठग रहे हैं जिसमे वे वेरिफिकेशन के लिए एक नंबर पर कॉल करने के लिए कहा जाता है। कंपनी ने ग्राहकों को हिदायत दी है कि वे किसी भी एसएमएस या कॉल पर विश्वास न करें, जो ई-केवाईसी पूरा करने के लिए जोर दिया जाता है।
- कंपनी ने ऐसे ई-केवाईसी एसएमएस में दिए गए नंबरों पर कॉल बैक करने से सख्त मना किया है। इसके साथ ही नोटिस में काम करने के तरीके को समझाते हुए लिखा है कि आमतौर पर डिटेल शेयर करने के लिए एक कॉल बैक नंबर का भी उल्लेख किया जाता है। जब दिए गए नंबर पर कॉल बैक किया जाता है, तो एक थर्ड पार्टी ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है, जो ग्राहक के फोन और संबंधित बैंक खातों तक रिमोट एक्सेस लेने की अनुमति देता है। साथ ही जियो ने ग्राहकों से लिंक अथवा अटैचमेंट पर क्लिक न करने की सलाह दी है।
