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चीन: अपने नियंत्रण वाले इलाके के 25 किमी अंदर बनाया पुल, 1959 में ही ड्रैगन ने कर लिया था कब्जा

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एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 21 Jan 2022 03:49 AM IST

सार

रक्षा सूत्रों ने बताया कि भारत भी वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में पैंगोंग झील और अन्य सीमावर्ती इलाकों में आधारभूत ढांचे का काफी विकास कर रहा है।

पैंगोंग त्से झील इलाके की सैटेलाइट तस्वीर
– फोटो : Twitter/JackDetsch

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पैंगोंग त्से झील के किनारे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की ओर से बनाए गए पुल की तस्वीर दिखाकर एक न्यूज चैनल ने इसे चीन का भारतीय सीमा में किया गया निर्माण बताया था। बाद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक ट्वीट में इसके निर्माण पर भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए थे। इस मामले में घबराने जैसा कुछ नहीं है। जिस इलाके में चीन ने इस पुल का निर्माण किया है, वह उसकी नियंत्रित सीमा के 25 किलोमीटर अंदर है। इस इलाके पर पीएलए ने 1959 में ही कब्जा कर लिया था।

रक्षा सूत्रों ने जानकारी दी कि यह पुल रुतोग के करीब खुर्नक किला क्षेत्र के पास स्थित है। भारत के खिलाफ आक्रामक नीति अपनाने के बाद पीएलए ने इस इलाके पर कब्जा किया था। इसके बाद इस पुल के निर्माण में चीन के इंजीनियरों ने काफी मशक्कत की है। इससे उसके बख्तरबंद वाहनों को झील के किनारे आवागमन में मदद मिलेगी।

साथ ही, सूत्रों ने बताया कि भारत भी वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में पैंगोंग झील और अन्य सीमावर्ती इलाकों में आधारभूत ढांचे का काफी विकास कर रहा है। लद्दाख सेक्टर में भारतीय बख्तरबंद वाहनों की भी बड़ी संख्या में मौजूदगी है। चीनी सेना के किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए लद्दाख सेक्टर में सैनिकों की संख्या भी काफी बढ़ाई गई है।

चीन की सेना के फिंगर क्षेत्र, गलवां घाटी, हॉट स्प्रिंग्स और कोंगरुंग नाला में अतिक्रमण के प्रयास के बाद अप्रैल-मई 2020 से भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं। गलवां घाटी में जून-2020 में चीनी सेना के हमले में 20 भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद हालात काफी खराब हो गए थे। दोनों सेनाओं के बीच तनाव के हल के लिए नई दिल्ली और बीजिंग के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बातचीत चल रही है। इस वार्ता के अब तक 14 दौर हो चुके हैं।

राहुल गांधी ने उठाए थे सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया था कि चीन लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील पर एक पुल का निर्माण कर रहा है। इसे लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज भी कसा था। राहुल ने पीएम मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि वह इस पुल का उद्घाटन करने भी जा सकते हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह चीनी सेना की हिम्मत को बढ़ा रहा है।

राहुल गांधी ने हिंदी में ट्वीट करते हुए आरोप लगाया था कि चीन हमारे देश में एक रणनीतिक पुल का निर्माण कर रहा है। पीएम की चुप्पी के कारण चीन की सेना की हिम्मत बढ़ रही है। अब डर है कि पीएम इस पुल का उद्घाटन करने के लिए भी जा सकते हैं। उन्होंने उत्तरी तट को पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी तट से जोड़ने वाले पुल की उपग्रह तस्वीरों को भी साझा किया था।

विस्तार

पैंगोंग त्से झील के किनारे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की ओर से बनाए गए पुल की तस्वीर दिखाकर एक न्यूज चैनल ने इसे चीन का भारतीय सीमा में किया गया निर्माण बताया था। बाद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक ट्वीट में इसके निर्माण पर भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए थे। इस मामले में घबराने जैसा कुछ नहीं है। जिस इलाके में चीन ने इस पुल का निर्माण किया है, वह उसकी नियंत्रित सीमा के 25 किलोमीटर अंदर है। इस इलाके पर पीएलए ने 1959 में ही कब्जा कर लिया था।

रक्षा सूत्रों ने जानकारी दी कि यह पुल रुतोग के करीब खुर्नक किला क्षेत्र के पास स्थित है। भारत के खिलाफ आक्रामक नीति अपनाने के बाद पीएलए ने इस इलाके पर कब्जा किया था। इसके बाद इस पुल के निर्माण में चीन के इंजीनियरों ने काफी मशक्कत की है। इससे उसके बख्तरबंद वाहनों को झील के किनारे आवागमन में मदद मिलेगी।

साथ ही, सूत्रों ने बताया कि भारत भी वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में पैंगोंग झील और अन्य सीमावर्ती इलाकों में आधारभूत ढांचे का काफी विकास कर रहा है। लद्दाख सेक्टर में भारतीय बख्तरबंद वाहनों की भी बड़ी संख्या में मौजूदगी है। चीनी सेना के किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए लद्दाख सेक्टर में सैनिकों की संख्या भी काफी बढ़ाई गई है।

चीन की सेना के फिंगर क्षेत्र, गलवां घाटी, हॉट स्प्रिंग्स और कोंगरुंग नाला में अतिक्रमण के प्रयास के बाद अप्रैल-मई 2020 से भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं। गलवां घाटी में जून-2020 में चीनी सेना के हमले में 20 भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद हालात काफी खराब हो गए थे। दोनों सेनाओं के बीच तनाव के हल के लिए नई दिल्ली और बीजिंग के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बातचीत चल रही है। इस वार्ता के अब तक 14 दौर हो चुके हैं।

राहुल गांधी ने उठाए थे सवाल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया था कि चीन लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील पर एक पुल का निर्माण कर रहा है। इसे लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज भी कसा था। राहुल ने पीएम मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि वह इस पुल का उद्घाटन करने भी जा सकते हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह चीनी सेना की हिम्मत को बढ़ा रहा है।

राहुल गांधी ने हिंदी में ट्वीट करते हुए आरोप लगाया था कि चीन हमारे देश में एक रणनीतिक पुल का निर्माण कर रहा है। पीएम की चुप्पी के कारण चीन की सेना की हिम्मत बढ़ रही है। अब डर है कि पीएम इस पुल का उद्घाटन करने के लिए भी जा सकते हैं। उन्होंने उत्तरी तट को पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी तट से जोड़ने वाले पुल की उपग्रह तस्वीरों को भी साझा किया था।

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