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बढ़ा बैंकों का बैलेंसशीट: आरबीआई ने कहा- सकल एनपीए घटकर हुआ 6.9 फीसदी 

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फंसे कर्ज के मोर्चे पर यह साल बैंकों के लिए राहत भरा रहा है। इस दौरान बैंकों के सकल एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) में 1.9 फीसदी की गिरावट आई है। आरबीआई ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट ‘ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया-2020-21’ में बताया कि बैंकों का सकल एनपीए मार्च, 2021 अंत तक घटकर 7.3 फीसदी रहा गया, जो मार्च, 2020 में 8.2 फीसदी था। सितंबर, 2021 तक यह और घटकर 6.9 फीसदी रह गया। 

रिपोर्ट के मुताबिक, 2020-21 के दौरान महामारी और आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती के बावजूद बैंकों के बैलेंसशीट का आकार बढ़ा है। 2021-22 में अब तक कर्ज वृद्धि में सुधार के शुरुआती संकेत मिले हैं। सितंबर, 2021 अंत तक बैंकों की जमा राशि में 10.1 फीसदी का इजाफा हुआ, जो एक साल पहले 11 फीसदी थी।

महामारी के बाद पुनर्पूंजीकरण जरूरतों पर आरबीआई ने कहा कि 30 सितंबर, 2021 तक की नकदी की स्थिति के आधार पर सभी सरकारी और निजी बैंकों ने पूंजी संरक्षण बफर (सीसीबी) को 2.5 फीसदी से अधिक बनाए रखा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस अवधि में बैंकों का रिटर्न ऑन एसेट्स (आरओए) 0.2 फीसदी से बढ़कर 0.7 फीसदी हो गया है। इसे स्थायी आय और खर्च में कमी का समर्थन मिला है।

जोखिम प्रबंधन उपायों को मजबूत करें बैंक 
रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी के कारण पैदा हुईं आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए बैंकों को अपने कामकाज के संचालन, कॉरपोरेट प्रशासन और जोखिम प्रबंधन रणनीतियों को मजबूत करने की जरूरत है। डिजिटल भुगतान में तेजी से तकनीकी प्रगति और नई फिनटेक कंपनियों के उभरने के साथ बैंकों को अपनी साइबर सुरक्षा उपायों को मजबूत करना होगा। ग्राहक सेवाओं में सुधार को भी प्राथमिकता देनी होगी। केंद्रीय बैंक ने कहा कि आने वाले समय में बैंकों के बही-खाते में सुधार समग्र आर्थिक वृद्धि के आसपास टिका है, जो महामारी पर काबू पाने पर निर्भर है। ऐसे में बैंकों को अपनी पूंजी की स्थिति को और मजबूत बनानी होगी। 

डिजिटल मुद्रा का बुनियादी मॉडल अपनाने की जरूरत 
आरबीआई ने रिपोर्ट में कहा कि भारत को शुरुआत में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) का बुनियादी मॉडल अपनाना चाहिए। सीबीडीसी को अत्याधुनिक बनाने के लिए भुगतान प्रणाली ढांचे का इस्तेमाल करना चाहिए। हालांकि, इसे मान्यता देने और व्यवहार में लाने से पहले कुछ बड़े सवाल हैं, जिनके जवाब खोजने होंगे। केंद्रीय बैंक ने कहा कि वृहद आर्थिक नीति बनाने में इसके प्रभाव को देखते हुए शुरुआत में बुनियादी मॉडल को अपनाना जरूरी है ताकि इसका व्यापक परीक्षण हो सके।

इस तरह मौद्रिक नीति एवं बैंकिंग प्रणाली पर इसका मामूली असर होगा। केंद्रीय बैंक ने कहा कि अपने नागरिकों एवं वित्तीय संस्थानों को अत्याधुनिक सीबीडीसी मुहैया कराने के लिए भुगतान प्रणालियों में प्रगति जरूरी है। परंपरागत मुद्रा की तुलना में सीबीडीसी तरलता, स्वीकार्यता और लेनदेन की सुगमता के नजरिये से ज्यादा बेहतर साबित हो सकती है। सीबीडीसी अपने बुनियादी स्वरूप में भौतिक मुद्रा का एक सुरक्षित, सशक्त एवं सुविधाजनक विकल्प देता है। विभिन्न डिजाइन विकल्पों को देखते हुए इसे एक वित्तीय साधन का जटिल रूप भी माना जा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीडीसी को लॉन्च करने से पहले हमें कुछ मामलों में स्थितियां साफ करने की जरूरत है। हमें यह तय करना होगा कि यह सामान्य उद्देश्य के लिए होगी और क्या खुदरा सौदों में भी इसका इस्तेमाल हो सकेगा या फिर इसका उपयोग थोक सौदों के मामलों में ही होगा।

यह भी स्पष्ट करना होगा कि क्या सीबीडीसी को सीधे आरबीआई जारी करेगा या फिर वाणिज्यिक बैंक जारी करेंगे। कितनी मात्रा में यह मुद्रा जारी की जाएगी और वितरण कैसे होगा, इसका मानक तय करना भी जरूरी है। हमें इस मुद्रा के लिए सही तकनीक चुनने में मदद मिलेगी।

वित्तीय क्षेत्र के लिए रणनीति बनाने की जरूरत
आरबीआई ने कहा कि भारत का वित्तीय क्षेत्र अभी चौराहे पर है। इस क्षेत्र में चुनौतियों से निपटने के लिए सावधानीपूर्वक रणनीति बनाने की जरूरत है। जलवायु परिवर्तन और तकनीकी नवाचारों के साथ महामारी से उपजी चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार रहना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, अर्थव्यवस्था और वित्तीय स्थिरता पर जलवायु परिवर्तन के प्रणालीगत असर का आकलन अभी विकास के दौर में है। दुनियाभर के केंद्रीय बैंक इससे निपटने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को लेकर अभी स्पष्ट नहीं हैं।

एनबीएफसी में तेजी की उम्मीद
केंद्रीय बैंक ने कहा कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के आने वाले समय में भी तेज बने रहने की उम्मीद है। अर्थव्यवस्था में सुधार और टीकाकरण की तेज रफ्तार से एनबीएफसी क्षेत्र को समर्थन मिलने की उम्मीद है। वित्तीय प्रणाली एक हाइब्रिड व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जिसमें एनबीएफसी को अहमियत मिल रही है। आने वाले वर्षों में इसकी प्रगति जारी रहने की संभावना है।

10 साल का बॉन्ड यील्ड 20 महीने के उच्च स्तर पर
भारत का 10 साल का बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड 20 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इस समय 10 साल के बॉन्ड पर मिलने वाली ब्याज की दर करीब 6.50 फीसदी है, जो 13 अप्रैल, 2020 के बाद सर्वोच्च स्तर है। बॉन्ड यील्ड में तेजी के तीन प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला..सरकार बड़े पैमाने पर कर्ज लेने वाली है। दूसरा…वैश्विक बाजार में कच्चे तेल का भाव बढ़ता जा रहा है। तीसरा…आरबीआई की ओर से अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष मदद नहीं मिली, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। भारत सरकार शुक्रवार को 240 अरब रुपये का बॉन्ड जारी करने वाली है। इसमें 130 अरब रुपये का बॉन्ड 10 साल की अवधि वाला है। सरकार अब तक 1.48 लाख करोड़ रुपये का बॉन्ड जारी कर चुकी है। 

पहली छमाही में बैंकिंग धोखाधड़ी के 4071 मामले, 36342 करोड़  की चपत : आरबीआई
साइबर ठगी को रोकने के तमाम उपायों के बावजूद मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले बढ़कर 4,071 पर पहुंच गया है। एक साल पहले की समान अवधि में यह संख्या 3,499 थी। 

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की बैंकिंग प्रवृत्ति एवं प्रगति के बारे में मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया कि बैंकिंग कामकाज से संबंधित धोखाधड़ी के मामले बढ़ गए हैं। हालांकि, अप्रैल-सितंबर, 2021 के दौरान हुई धोखाधड़ी में शामिल रकम 36,342 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले की समान अवधि में 64,261 करोड़ रुपये थी।

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में बैंकों ने 35,060 करोड़ रुपये मूल्य के अग्रिम भुगतान से संबंधित धोखाधड़ी के 1,802 मामले दर्ज किए। वहीं, 1,532 मामले कार्ड भुगतान एवं इंटरनेट भुगतान से संबंधित थे, जिनकी कुल राशि 60 करोड़ रुपये थी। रिपोर्ट के मुताबिक पहली छमाही में जमाओं से संबंधित धोखाधड़ी के 208 मामले सामने आए जिसमें 362 करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई। गौर करने वाली बात यह है कि धोखाधड़ी के आधे से अधिक मामले निजी क्षेत्रों के बैंकों से संबंधित हैं। 

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