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संयुक्त राष्ट्र महासभा: आतंकी चेहरे की पोल खोल रहे हमारे युवा अफसर,  दुनियाभर में बटोरी तारीफ

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एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र।
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 26 Sep 2021 06:17 AM IST

सार

स्नेहा दुबे ने सख्त लहजे में कहा, पाक आतंकियों को खुला समर्थन देता है और झूठ बोलते हुए यूएन के मंच का भारत के अंदरूनी मामलों में दखल देने के लिए गलत इस्तेमाल करता है। स्नेहा की आत्मविश्वास से भरी कड़ी प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है।

ईनम गंभीर, विदिशा मैत्रा, मिजितो विनितो और स्नेहा दुबे
– फोटो : Self

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कभी वह ईनम होती है, कभी विदिशा। पिछली बार विनितो थे तो इस बार स्नेहा है। भारतीय विदेश सेवा के ये युवा अफसर आतंकवाद के पोषक पड़ोसी पाकिस्तान को करारा जवाब दे रहे हैं। तालिबान खान के नाम से जाने जाते रहे पाकिस्तानी पीएम इमरान खान को इस बार सयुक्त राष्ट्र महासभा में करारा जवाब दिया युवा आईएफएस अधिकारी स्नेहा दुबे ने।

स्नेहा ने सख्त लहजे में कहा, पाक आतंकियों को खुला समर्थन देता है और झूठ बोलते हुए यूएन के मंच का भारत के अंदरूनी मामलों में दखल देने के लिए गलत इस्तेमाल करता है। स्नेहा की आत्मविश्वास से भरी कड़ी प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। लोगों ने उन्हें बहादुर व ऊर्जावान कूटनीतिज्ञ करार दिया। वहीं, कुछ लोगों ने वैश्विक मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाली नारी व युवा शक्ति को सलाम भी किया। लेकिन पहली बार नहीं है कि किसी युवा अधिकारी से पाक को करारा जवाब मिला है। असल में यह भारत की सोची-समझी रणनीति है, जिसकी शुरुआत पांच साल पहले हुई थी।

2016 में यूएन में भारतीय राजदूत सैयद अकबरुद्दीन के कार्यकाल से संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को जवाब देने के लिए युवाओं की तैनाती होने लगी थी। इसके पीछे भारत का मकसद यह साफ संदेश देने था कि उसके युवा कूटनीतिक अधिकारी वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की गलतबयानियों से बखूबी निपट सकते हैं। स्नेहा ने शुक्रवार को यह फिर साबित कर दिखाया है। 

ईनम, विदिता के बाद स्नेहा दुबे ने यूएन महासभा में पाकिस्तान को दिखाया आईना

  • ईनम गंभीर : सितंबर 2016 में प्रथम सचिव ईनम गंभीर ने पाक पीएम नवाज शरीफ को अंदरूनी मामलों के जिक्र पर करारा जवाब दिया था। 2017 में पाक पीएम शाहिद खान अब्बासी के जवाब में पाकिस्तान को आतंक की धुरी बताया था।
  • विदिशा मैत्रा : 2019 में इमरान को खूब लताड़ा। कहा, पाक पीएम द्वारा इस्तेमाल नरसंहार, रक्तपात और नस्लीय श्रेष्ठता, बंदूक उठाने आखिर तक लड़ने जैसे शब्द मध्यकालीन सोच दिखाती है। आतंकवाद के बचाव पर इमरान की बेशर्मी दुनिया के सामने उजागर की थी।  2019 में इमरान आधा समय सिर्फ कश्मीर पर बोले थे।
  • मिजितो विनितो : पिछले साल तैनात प्रथम सचिव मिजितो ने दहशत के कारोबार को लेकर पाकिस्तान के दोहरे चरित्र पर कहा था, दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तान के पास सिर्फ आतंक, नस्ली हत्याएं, बहुसंख्यक कट्टरवाद और परमाणु कारोबार का ही गौरव है।
  • स्नेहा दुबे : 2012 बैच की विदेश सेवा अधिकारी स्नेहा ने पुणे से स्नातक और दिल्ली में जेएनयू से एमए-एमफिल किया। शुरुआती तैनातियों के बाद मैड्रिड स्थित भारतीय दूतावास में तैनात की गई थीं।

विस्तार

कभी वह ईनम होती है, कभी विदिशा। पिछली बार विनितो थे तो इस बार स्नेहा है। भारतीय विदेश सेवा के ये युवा अफसर आतंकवाद के पोषक पड़ोसी पाकिस्तान को करारा जवाब दे रहे हैं। तालिबान खान के नाम से जाने जाते रहे पाकिस्तानी पीएम इमरान खान को इस बार सयुक्त राष्ट्र महासभा में करारा जवाब दिया युवा आईएफएस अधिकारी स्नेहा दुबे ने।

स्नेहा ने सख्त लहजे में कहा, पाक आतंकियों को खुला समर्थन देता है और झूठ बोलते हुए यूएन के मंच का भारत के अंदरूनी मामलों में दखल देने के लिए गलत इस्तेमाल करता है। स्नेहा की आत्मविश्वास से भरी कड़ी प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। लोगों ने उन्हें बहादुर व ऊर्जावान कूटनीतिज्ञ करार दिया। वहीं, कुछ लोगों ने वैश्विक मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाली नारी व युवा शक्ति को सलाम भी किया। लेकिन पहली बार नहीं है कि किसी युवा अधिकारी से पाक को करारा जवाब मिला है। असल में यह भारत की सोची-समझी रणनीति है, जिसकी शुरुआत पांच साल पहले हुई थी।

2016 में यूएन में भारतीय राजदूत सैयद अकबरुद्दीन के कार्यकाल से संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को जवाब देने के लिए युवाओं की तैनाती होने लगी थी। इसके पीछे भारत का मकसद यह साफ संदेश देने था कि उसके युवा कूटनीतिक अधिकारी वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की गलतबयानियों से बखूबी निपट सकते हैं। स्नेहा ने शुक्रवार को यह फिर साबित कर दिखाया है। 

ईनम, विदिता के बाद स्नेहा दुबे ने यूएन महासभा में पाकिस्तान को दिखाया आईना

  • ईनम गंभीर : सितंबर 2016 में प्रथम सचिव ईनम गंभीर ने पाक पीएम नवाज शरीफ को अंदरूनी मामलों के जिक्र पर करारा जवाब दिया था। 2017 में पाक पीएम शाहिद खान अब्बासी के जवाब में पाकिस्तान को आतंक की धुरी बताया था।
  • विदिशा मैत्रा : 2019 में इमरान को खूब लताड़ा। कहा, पाक पीएम द्वारा इस्तेमाल नरसंहार, रक्तपात और नस्लीय श्रेष्ठता, बंदूक उठाने आखिर तक लड़ने जैसे शब्द मध्यकालीन सोच दिखाती है। आतंकवाद के बचाव पर इमरान की बेशर्मी दुनिया के सामने उजागर की थी।  2019 में इमरान आधा समय सिर्फ कश्मीर पर बोले थे।
  • मिजितो विनितो : पिछले साल तैनात प्रथम सचिव मिजितो ने दहशत के कारोबार को लेकर पाकिस्तान के दोहरे चरित्र पर कहा था, दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तान के पास सिर्फ आतंक, नस्ली हत्याएं, बहुसंख्यक कट्टरवाद और परमाणु कारोबार का ही गौरव है।
  • स्नेहा दुबे : 2012 बैच की विदेश सेवा अधिकारी स्नेहा ने पुणे से स्नातक और दिल्ली में जेएनयू से एमए-एमफिल किया। शुरुआती तैनातियों के बाद मैड्रिड स्थित भारतीय दूतावास में तैनात की गई थीं।

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